व्यभिचार से बचे रहो: जितने और पाप मनुष्य करता है, वे देह के बाहर हैं, परन्तु व्यभिचार करने वाला अपनी ही देह के विरूद्ध पाप करता है।

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परन्तु प्रभु तू दयालु और अनुग्रहकारी ईश्वर है,तू विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है।