
जैसे जल में मुख की परछाई सुख से मिलती है, वैसे ही एक मनुष्य का मन दूसरे मनुष्य के मन से मिलता है।
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परन्तु प्रभु तू दयालु और अनुग्रहकारी ईश्वर है,तू विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है।